मैं पड़ोस के एक घर में जाकर बच्चों की देखरेख करती थी। उनके दो बच्चे थे। इसके लिए मुझे घंटे के हिसाब से मेहनताना भी मिल जाता था। लड़का छह साल और लड़की आठ साल की थी। रात को दोनों को सुलाने में मुझे काफी परेशानी होती थी।
एक रात लड़का सोने के समय काफी रोने लगा। तभी उसकी बहन भागती आई और मुझे एक तरफ ले जाकर पूछा, “आंटी क्या आप हमें सच्ची में प्यार करती हैं या सिर्फ पैसे पाने के लिए करती हैं।”
मैं लड़की का चेहरा देखते ही रह गई, मुझे समझ नहीं आया कि उसे क्या जवाब दूं।
(डेबी हैनागन)
‘ईर्ष्या, असफलता का दूसरा नाम है। ईर्ष्या करने से अपना ही महत्व कम होता है।’
-चाणक्य नीति
‘जो लोग सचमुच बुद्धिमान हैं, वे असफलताओं से कभी नहीं घबराते।’
-शेक्सपीयर
‘आपके कार्य की नींव आपका आत्मविश्वास है। आप अमुक कार्य कर सकते हैं, इस विचार में ही शक्ति है।’
-स्वेट मार्टेन

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