Tuesday, May 11, 2010

जीवन का समर्पण

एक चोर था उसका नाम किशन था एक दिन की बात है वो चोरी करने गया!दिन भर उही भटकता रहा सुबह से शाम हो गयी पर उसको कुछ भी हाथ नहीं लगा वो निराश हो कर घर जा रहा था !की राह मै शिव जी का एक मंदिर था उसने शोचा की मंदिर मै शिव जी के दर्शन कर लु आज नहीं तो कल तो कुछ मिलेगा! वो मंदिर के अंदर गया वहा उसने शिवे के दर्शन करने क बाद जैसे ही उसने उप्पर देखा वहा टंगी हुवी चांदी की घंटी दिखाई दी तो उसके मन मै ख्याल आया की घंटी ही चुरा लेता हु कुछ काम तो चलेगा! मगर घंटी बहुत उचाई पर थी! और उसका हाथ वहा तक नहीं पहुच पा रहा था ! अब वो क्या करे ! हड़बड़ी मै उसे और कुछ तो शुझा नहीं घंटी चुराने के वो मूर्ति पर ही चढ़ गया !
ज्यो ही वह मूर्ति पर चडा, शिवजी प्रकट हो गए ! बोले ,वत्स मै तुझसे प्रसन हूँ घंटी-वंटी छोड़ ,आज मुझसे मांग ले तुझे क्या चाहिए ? चोर तो घबरा ही गया ! उसने सोचा बुरे फंसे ! वह मफही मांगने लगा !भोले शिव जी बोले- घबरा मत ,मै पुलिस वाला नहीं हु ,मै शिव हु ! तेरे समर्पण से प्रसन होकर प्रकट हुवा हु ! मांग ले क्या माँगना है ? इसी बीच मंदिर का पुजारी आ गया! पुजारी नै मामला देखा तो दंग रह गया ! पुजारी चिल्य्या-प्रभु आप भी कमाल करते है ,मै पुजारी हु ,मेरी पूजा से तो कभी प्रसन नहीं हुए और इस पर प्रसन ... यह भक्त नहीं कम्भ्क्त चोर है यहाँ चोरी के लिया आया है मै तो रोज पूजा करता हु वरदान मांगने क लिए मुझे कहिये शिव जी बोले तू मेरी पूजा रोज करता है रोज पुष्प,फल अर्पित करते हो पर इसके पास क्या है
प्रभु के चरणों मै अर्पित करना ही है तो अपने आपको .अपने अहेंकार को ,प्रभु को इससे बढकर भेट और क्या हो सकती है

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