Friday, June 25, 2010
Sunday, June 13, 2010
Wednesday, June 2, 2010
देखते है
सुना है लोग उसे आँख भर के देखते है
सो उसके शहर मै कुछ दिन ठहर के दहकते है
सुना है बोले तो बातों से फूल झड़ते है
ये बात है तो बात करके देखते है
सुना है उसके लबों से गुलाब जलते है
सो हम बहार पर इल्जाम धरके देखते है
सुना है उसके बदन की तराश ऐसी है
की फूल अपनी कबाये कुतर के देखते है
रुके तो गर्दिशे उसका तवाफ़ करती है
चले तो उसको जमाने ठहर के देखते है
किसे नसीब कि पैरहन उसे देखते है
कभी-कभी दरो दिवार घर के देखते है
सो उसके शहर मै कुछ दिन ठहर के दहकते है
सुना है बोले तो बातों से फूल झड़ते है
ये बात है तो बात करके देखते है
सुना है उसके लबों से गुलाब जलते है
सो हम बहार पर इल्जाम धरके देखते है
सुना है उसके बदन की तराश ऐसी है
की फूल अपनी कबाये कुतर के देखते है
रुके तो गर्दिशे उसका तवाफ़ करती है
चले तो उसको जमाने ठहर के देखते है
किसे नसीब कि पैरहन उसे देखते है
कभी-कभी दरो दिवार घर के देखते है
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