तुम में और मेरी तम्मना में एक ही फर्क था
तुम कभी मेरी न हो सकी और में कभी तम्मना का न हो सका
एषा पथेर सा हो गया में न जी भर के हाश सका न रो सका
तुम में हे थी कोई बात ऐ यार
तुम कितनो के हो गए में किसी का न हो सका
तुमने पेरो लिए सब खुशिया दमन में
और एक में के गम भी धागे में न पिरो सका.
Sunday, June 13, 2010
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